Bermuda Triangle Mystery – बरमूडा ट्रायंगल का रहस्य क्या है?

Bermuda Triangle Mystery – बरमूडा ट्रायंगल का रहस्य क्या है? बरमुंडा ट्रायंगल को लेकर के दुनिया भर में कई सारी कहानियां सुनाई जाती है. बरमुंडा ट्रायंगल इतना रहस्यमई जगह क्यों है? आखिर इस जगह ऐसी क्या घटनाएं हुई है कि लोग बरमुंडा ट्रायंगल की रहस्यमई कहानियां सुनाते हैं.

बरमुंडा ट्रायंगल से जुड़ी कई सारी किस्से कहानियां अक्सर न्यूज़पेपर और सोशल मीडिया पर आता रहता है. बरमूडा ट्रायंगल के बारे में बहुत ही उपाय भी उड़ाई जाती है. बरमुंडा ट्रायंगल के ऊपर से उड़ने वाली हवाई जहाज या समुद्री जहाज कभी वापस नहीं आते? यहां आने वाले जहाज रहस्यमय ढंग से गायब हो जाते हैं. और ना जाने कितनी कहानियां बरमुंडा ट्रायंगल से जुड़ी हुई है. आज के हमारे इस लेख में हम बरमूडा ट्रायंगल से जुड़ी हर पहलू के बारे में बात करेंगे. Bermuda Triangle Mystery – बरमूडा ट्रायंगल का रहस्य क्या है?

Bermuda Triangle Mystery – बरमूडा ट्रायंगल का रहस्य क्या है?

बरमुंडा ट्रायंगल एक ऐसा क्षेत्र है जो उतरी अमेरिका के पश्चिम अटलांटिक महासागर में आता है. इसका आकार त्रिकोण है यही वजह है कि इसे बरमुंडा ट्रायंगल कहा जाता है. बरमूडा ट्रायंगल फ्लोरिडा, प्रोटीरीको और बरमुंडा इन तीन क्षेत्रों से जुड़ता है और यह एक त्रिकोण का आकार लेता है. इसी वजह से इसे बरमुंडा ट्रायंगल कहते हैं.

बरमुंडा ट्रायंगल से जुड़ी कई सारी कहानियां आपने सुनी होगी. लेकिन हम आज अपने इस लेख में बरमूडा ट्रायंगल की कहानी कैसे शुरू हुई और यहां पर कौन-कौन सी घटनाएं हुई जिसके चलते बरमुंडा ट्रायंगल दुनिया भर में अपने रहस्यमई गतिविधियों के कारण प्रसिद्ध हो गया इन सारी बातों के ऊपर चर्चा करेंगे.

बरमुंडा ट्रायंगल और कोलंबस

बरमूडा ट्रायंगल के बारे में पहले बार क्रिस्टोफर कोलंबस ने किया था. उसने अपनी समुद्री यात्रा के बारे में बताते हुए कहा था उसके चालक दल ने आकाश में एक अद्भुत रोशनी देखी थी. अपनी लॉग बुक में क्रिस्टोफर कोलंबस ने इस बात का भी जिक्र किया था कि उसने आकाश से आग की लपटों को घिरते देखा था. इसके साथ ही क्रिस्टोफर कोलंबस ने यह भी बताया था कि समुद्र में यात्रा के दौरान उन्हें एक ऐसी जगह भी मिली जहां उनका दिशा यंत्र काम नहीं कर रहा था.

बाद में खोजकर्ता और वैज्ञानिकों ने यह पता लगाया कि उनके द्वारा देखी गई रोशनी टेनो (Taino) के वासियों द्वारा उनकी dong-yeon में रसोई के लिए चलाई गई आग से उत्पन्न हुआ था. वही दिशा यंत्र का गलत दिशा बताना सितारों की हलचल की वजह से हुआ था.

लेकिन जैसे-जैसे समय बीता गया, लोगों ने बरमुंडा ट्रायंगल से जुड़ी कई सारी रसमई घटनाएं के बारे में जिक्र करना शुरू कर दिया था.

बरमुंडा ट्रायंगल का नाम सबसे पहले विंसेंट एच गड्डीस (Vincent H. Gaddis) द्वारा वर्ष 1964 में दिया गया था. उन्होंने अपने एक लेख में बरमूडा ट्रायंगल में होने वाली घटनाओं जिसमें विमान के गायब हो जाना और जलपोतों के आश्चर्यजनक तरीके से समुद्र से गायब हो जाने के बारे में विस्तार से बताया था. इस तरह से उन्होंने अपनी इस लेख में बताया कि किस तरह से उत्तरी अटलांटिक महासागर का पश्चिमी क्षेत्र जो कभी बेनाम हुआ करता था. आज पूरी दुनिया में बरमुंडा ट्रायंगल के नाम से विख्यात हो गया है.

इस घटना के बाद कई सारे पायलट और समुद्री जहाज के नाविकों ने उस इलाके से गुजरने के बाद अपने साथ ही दुर्घटनाओं के बारे में जिक्र करना शुरू किया. कई लोगों ने इस जगह को लेकर के मनगढ़ंत कहानियां भी बनाई. इसके पीछे बस उनका उद्देश्य पब्लिसिटी पाना था. लेकिन इस चित्र में होने वाली कुछ घटनाओं को लेकर के कुछ लोगों के मजबूत विचार भी थे जो इस क्षेत्र को विस्मयकारी बनाता है.

बरमूडा ट्रायंगल का भौगोलिक विवरण

बरमुंडा ट्रायंगल अटलांटिक महासागर का एक त्रिभुज आकार या त्रिकोण आकार का क्षेत्र है. जो कि 3 बिंदुओं को जोड़कर त्रिभुज आकार आकार लेता है. इसी वजह से इसे बरमुंडा ट्रायंगल या बरमुंडा त्रिकोण कहा जाता है.

तीन बिंदु फ्लोरिडा, बरमुंडा दीप और पूरेटोरिको माने जाते हैं. जो कि एक त्रिकोण का आकार लेता है. उत्तरी अटलांटिक महासागर के पश्चिमी क्षेत्र में मौजूद बरमुंडा त्रिभुज के क्षेत्रफल और इसका विस्तार पर अलग-अलग उल्लेख मिलते हैं. कहीं-कहीं इस क्षेत्र का कुल क्षेत्रफल 1300000 वर्ग किलोमीटर से 3900000 वर्ग किलोमीटर है के आसपास बताई जाती है.

इतिहास के पन्नों को अगर पलट के देखे तो बरमुंडा ट्रायंगल में ऐसी कई सारी घटनाएं जैसे विमानों एवं पानी जहाजों का और हजारों लोगों का इस क्षेत्र से गायब हो जाने का उल्लेख मिलता है. तू कई बार कई सारे जहाजों को वापस से खोज निकाला गया लेकिन उनके चालक दल के सदस्यों से गायब थे. इस तरह की और भी कई कहानियां इस क्षेत्र से जुड़ी हुई है जो इस क्षेत्र को रहस्यमई और और भी डरावना बनाती है.

बरमूडा ट्रायंगल से जुड़ी किंवदतियां
बरमूडा ट्रायंगल

बरमुंडा ट्रायंगल को लेकर के कई सारी कहानियां प्रचलित है. कई लोग यहां पर अन्य ग्रहों और पैरानॉर्मल एक्टिविटी के द्वारा यहां से गुजरने वाले जहाजों को डूबा दिया जाता है. ऐसा मानते हैं. इन्हीं से आधारित कहानियां दुनिया भर में प्रचलित है. इसलिए बरमुंडा ट्रायंगल को अनसुलझे रहस्य में से एक माना जाता है.

बरमुंडा ट्रायंगल को लेकर के वैज्ञानिक दृष्टिकोण

वैज्ञानिक दृष्टिकोण के आधार पर कई सारे बातें बरमुंडा ट्रायंगल को लेकर के कही जाती है. जिसमें से दो तब तक काफी तर्कसंगत भी लगता है. पहला जिसमें यह बताया गया है कि समुद्र क्षेत्र के इस बड़े हिस्से में मीथेन गैस का भंडार है. जिसके कारण पानी के अंदर बुलबुले उठते हैं, जिसकी वजह से इन क्षेत्रों में आए दिन तूफान और उफान आता है. जो किसी भी जहाज को डुबाने के लिए काफी है. जिसे जहाज डूब करके गायब हो जाते हैं.

इसके अलावा इस क्षेत्र से जुड़ी एक दूसरी धारणा भी है. इसके बारे में वैज्ञानिक बताते हैं कि यह क्षेत्र अत्यधिक शक्तिशाली चुंबकीय क्षेत्र में से एक है. जिसके कारण लोहे से बनी वस्तुएं यहां काम करना बंद कर देती है. हवाई जहाज और अन्य उड़न तश्तरी अपना रास्ता भटक जाते हैं या फिर समुद्र में दुर्घटनाग्रस्त हो जाते हैं. अंत में एक ही बात निकल कर सामने आती है कि भले ही विज्ञान ने काफी तरक्की कर ली हो. लेकिन, आज भी बरमूडा ट्रायंगल के रहस्य से पर्दा उठना बाकी है.

बरमूडा ट्रायंगल में हुई घटनाएँ

बरमुंडा ट्रायंगल से कई सारे जहाज और जलपोत गायब होने की घटनाएं वर्षों से चली आ रही है. यही वजह है कि बरमुंडा ट्रायंगल को सबसे रहस्यमय स्थानों में से एक में माना जाता है. बरमुंडा ट्रायंगल में हुई घटनाओं की एक सूची हम नीचे दे रहे हैं.

  • वर्ष 1881 में, एलेन ऑस्टिन नाम का एक जहाज यहां से लापता हो गया था.
  • वर्ष 1818 में अमरीकी जहाज साइक्लोप्स भी बरमुंडा ट्रायंगल से रहस्यमय ढंग से गायब हो चुका है.
  • वर्ष 1945 में 5 फ्लाइट 19 जहाज यहां से गायब हो चुके हैं.
  • वर्ष 1921 में Carroll A Deering नाम का जहाज दक्षिणी कैरोलिना के पास से गायब हो गया था.
  • वर्ष 1949 में स्टार्ट टाइगर और स्टार एरियल नाम की दो जहाज भी गायब हो चुके हैं.

यह कुछ प्रमुख घटनाएं है. बरमुंडा ट्रायंगल से यह सारे जहाज गायब हो चुके हैं. इनके अलावा भी कई सारे जहाज बरमुंडा ट्रायंगल से रहस्यमय ढंग से गायब हो जाने की घटना है सामने आती रही है.

आपको यह बात जानकर हैरानी होगी कि दुनिया भर में सबसे खतरनाक जगहों में बरमुंडा ट्रायंगल टॉप 10 खतरनाक जगहों में कहीं भी जगह नहीं बना पाता है. लेकिन इस सबके बावजूद लोग इसे हॉन्टेड और भूतिया घटनाओं की जगह मानते हैं. लेकिन यह जगह इतना हॉन्टेड कैसे हो गया?

लोगों ने इस टॉपिक का इस्तेमाल करके खूब पैसे बनाए और जमकर की अफवाहों का बाजार गर्म किया है. लेकिन फिर भी जो हादसे बरमूडा ट्रायंगल मैं घटे हैं उन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. 17 सितंबर को वर्ष 1950 में पहली बार यहां से किसी जहाज के गायब होने की खबर आई थी.

इस घटना के बाद अखबारों और पत्रिकाओं में इस जगह के बारे में अक्सर जिक्र किया जाने लगा. साल 2014 में क्यूबा की कोर्ट गार्ड ने एक जहाज दिखी थी जिस पर कोई नहीं था. यह जहाज राजधानी हवाना की तरफ बढ़ रही थी. उन्होंने बताया कि यह SS कोटोपैक्सी नाम की एक स्ट्रीमर जहाज थी. यह जहाज दिसंबर वर्ष 1925 में बरमूडा ट्रायंगल से गायब हो गई थी. अचानक या जहाज 90 सालों बाद जाने कहां से चली आई थी. Interesting fact about second World war द्वितीय विश्वयुद्ध के बारे में रोचक जानकारी पढ़ने के लिए यहां पर क्लिक करें.

इस स्ट्रीमर जहाज कि जब खोजबीन की गई तो वहां से जहाज के कप्तान की लॉग बुक मिली. उस लॉग बुक में SS कोटोपैक्सी कंपनी के जहाज के बारे में जिक्र किया गया था. लेकिन अभी तक इस जहाज के बारे में विस्तृत जानकारी नहीं आई है. लेकिन, इन सब के बावजूद यह सोचने का विषय है कि 90 सालों तक उस जहाज के साथ क्या हुआ और यह अब तक सुरक्षित कैसे है? आज भी लोग इस पर शोध कर रहे हैं.

बरमुंडा ट्रायंगल की सच्चाई

अक्टूबर 2016 में वैज्ञानिकों द्वारा एक नई थ्योरी दी गई, जो अब तक का सबसे ज्यादा विश्वसनीय थ्योरी मानी जाती है. इस थ्योरी पर ज्यादातर लोग यकीन भी करते हैं.

बरमुंडा ट्रायंगल में हेक्सागोनल बादल
बरमूडा ट्रायंगल का रहस्य
बरमुंडा ट्रायंगल में कुछ अलग ही तरह का मौसम पाया जाता है. यहां पर बनने वाले बादल हेक्सागोनल यानी कि इस मे 6 कोण होते हैं. इन बादलों के अंदर हवा, पानी और बिजली काफी तेज चमकती है. इन बादलों के अंदर हवा 270 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलती है. जो कि किसी एयर बम का आकार ले लेती है. इन बादलों से होकर गुजर ना मौत को दावत देना है.

इस थ्योरी के मुताबिक बरमूडा ट्रायंगल के ऊपर मौसम का प्रभाव कुछ अलग ही रहता है. बरमूडा ट्रायंगल के ऊपर हेक्सागोनल बादल बनते हैं. जिस तरह से त्रिकोण मे तीन कोण बनते हैं. उसी तरह से हेक्सागोनल में 6 कोण बनते हैं. अगर रसायन विज्ञान की भाषा में कहा जाए तो बेंजीन रिंग के जैसा. इन बादलों का आकार बहुत बड़ा होता है. इन बादलों के भीतर लगभग 270 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से हवा और बिजली और पानी बरसता है. इन बादलों से छोटे-छोटे एयर बम टूट कर के निकलते हैं जो सीधे आकर समुद्र से टकराते हैं. कभी-कभी इन बादलों से एक साथ कई सारे छोटे-छोटे हेयर बम समुद्र से टकराते हैं. इनके बीच में से जापान मुमकिन नहीं है. भले ही पानी में तैरने वाला बड़ा जहाज हो या आसमान में उड़ने वाला जंबो जेट. जब इस रफ्तार से एयर बम से टकराते हैं तो उनसे बचने की उम्मीद काफी कम होती है.

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