BhimRao Ambedkar Biography Hindi – डॉ. भीमराव अंबेडकर की जीवनी

BhimRao Ambedkar Biography Hindi – डॉ. भीमराव अंबेडकर की जीवनी – डॉक्टर भीमराव अंबेडकर भारतीय संविधान के शिल्पकार और आजाद भारत के पहले न्याय मंत्री थे. वे प्रमुख कार्यकर्ता और समाज सुधारक के रूप में जाने जाते हैं. डॉक्टर भीमराव अंबेडकर ने दलितों के उत्थान और भारत में पिछड़े वर्ग के उत्थान के लिए अपना पूरा जीवन परित्याग कर दिया. वे दलितों के मसीहा के रूप में मशहूर है. आज समाज में दलितों को जो स्थान मिला है उनका पूरा का पूरा श्रेय डॉक्टर भीमराव अंबेडकर को ही जाता है.

आज हमारे इस लेख में हम डॉक्टर भीमराव अंबेडकर -BhimRao Ambedkar Biography Hindi – डॉ. भीमराव अंबेडकर की जीवनी के बारे में विस्तार से जानेंगे.

BhimRao Ambedkar Biography Hindi – डॉ. भीमराव अंबेडकर की जीवनी

डॉक्टर भीमराव अंबेडकर – B. R Ambedkar का जन्म भारत के मध्य प्रांत में हुआ था. 14 अप्रैल 1891, मध्यप्रदेश के इंदौर के पास महू मे रामजी मलोजी सतपाल और भीमाबाई के घर में अंबेडकर जी पैदा हुए थे.

जब अंबेडकर जी का जन्म हुआ था तब उनके पिता इंडियन आर्मी में सूबेदार थे और उनकी पोस्टिंग इंदौर में हुई थी.

3 साल बाद, वर्ष 1894 मे इनके पिता रामजी मलोजी सकपाल आर्मी से रिटायर हो गए और उनका पूरा परिवार महाराष्ट्र के सतारा मे रहने चला गया. आपको बता दें कि भीमराव अंबेडकर अपने माता पिता की 14वीं और आखिरी संतान थे यह अपने परिवार में सबसे छोटे थे इसलिए पूरे परिवार के चहेते भी थे.

भीमराव अंबेडकर जो मराठी परिवार से तालुकात रखते थे. वह महाराष्ट्र के अंबावडे से संबंध रखते थे जो कि अब महाराष्ट्र के रत्नागिरी जिले में है. वे महार जाति यानी कि दलित वर्ग से संपर्क रखते थे जिसकी वजह से उनके साथ सामाजिक और आर्थिक रूप से गहरा भेदभाव किया जाता था.

यही नहीं दलित होने की वजह से उन्हें अपने उच्च शिक्षा पाने के लिए भी काफी संघर्ष करना पड़ा था. हालांकि सभी कठिनाइयों को पार करते हुए उन्होंने उच्च शिक्षा हासिल की है. और उन्होंने दुनिया के सामने खुद को साबित कर दिखाया है.

भीमराव अंबेडकर ने सामाजिक रूप से पिछड़े वर्ग की निराशा को दूर किया और उन्हें समानता का अधिकार दिलवाया. अंबेडकर जी ने हमेशा जातिगत भेदभाव को खत्म करने की लड़ाइयां लड़ी है. भारतीय समाज में जातिगत भेदभाव को लेकर फैली बुराइयों को दूर करने में उन्होंने अहम भूमिका निभाई है.

जातिगत भेदभाव ने भारतीय समाज को पूरी तरह से बिछड़ कर रख दिया था और अपंग बना दिया था. जिसे देखते हुए अंबेडकर जी ने दलितों के हक की लड़ाइयां लड़ी और देश की सामाजिक स्थिति में काफी हद तक बदलाव किया. BhimRao Ambedkar Biography Hindi

BhimRao Ambedkar Education – डॉक्टर भीमराव अंबेडकर जी की शिक्षा

डॉ भीमराव जी के पिता के आर्मी में होने की वजह से उन्हें सेना के बच्चों को दिए जाने वाली विशेष अधिकारों का फायदा मिला लेकिन उनके दलित होने की वजह से इस स्कूल में भी उन्हें जातिगत भेदभाव का शिकार होना पड़ा था.

दरअसल उनकी जाति के बच्चों को क्लास रूम के अंदर तक बैठने की अनुमति नहीं दी जाती थी. और तो और यहां तक उनको पानी भी नहीं छूने दिया जाता था, स्कूल का चपरासी उनको ऊपर से पानी डालकर पानी देता था. वहीं अगर चपरासी छुट्टी पर है तो दलित बच्चों को उस दिन पानी भी नसीब नहीं होता था. फिलहाल भीमराव अंबेडकर जी ने तमाम संघर्षों के बाद अच्छी शिक्षा हासिल की.

आपको बता दें कि भीमराव अंबेडकर ने अपनी प्राथमिक शिक्षा प्रणाली दापोली में सतारा में लिया था. इसके बाद उन्होंने मुंबई में एलपीस्टोन हाई स्कूल में एडमिशन लिया. इस तरह के उच्च शिक्षा हासिल करने वाले पहले दलित बन गए. वर्ष 1907 मे उन्होंने मैट्रिक की डिग्री हासिल की. BhimRao Ambedkar Biography Hindi

इस मौके पर एक दीक्षांत समारोह का भी आयोजन किया गया. इस समारोह में भीमराव अंबेडकर की प्रतिभा से प्रभावित होकर उनके शिक्षक श्री कृष्णा जी, अर्जुन केलुसकर ने उन्हें खुद से लिखी गई किताब ‘ बौद्ध चरित्र’ उपहार स्वरूप भेंट में दी थी. वही बड़ौदा नरेश सयाजीराव गायकवाड की फिलॉसफी पाकर अंबेडकर जी ने अपने आगे की पढ़ाई जारी रखी.

आपको बता दें कि अंबेडकर जी की बचपन से ही पढ़ाई में खासी रुचि थी. वे एक होनहार और कुशाग्र बुद्धि के विद्यार्थी थे. इसलिए वे अपनी हर परीक्षा में अच्छे अंक के साथ सफल होते चले गए.

वर्ष 1960 में, डॉक्टर भीमराव अंबेडकर ने एलफिस्टोन विश्वविद्यालय में एडमिशन ले कर के फिर इतिहास रच दिया. दरअसल वे पहले दलित विद्यार्थी थे जिन्होंने उच्च शिक्षा हासिल करने के लिए कॉलेज में दाखिला लिया था.

उन्होंने वर्ष 1912 में मुंबई विश्वविद्यालय से गिरीश वन की परीक्षा पास की. संस्कृत पढ़ने पर मनाही होने से वह फारसी भाषा में उतरे हुए. इस कॉलेज से उन्होंने अर्थ शास्त्र और राजनीति विज्ञान में डिग्री के साथ बेसन की उपाधि प्राप्त की.

BhimRao Ambedkar – कोलंबिया यूनिवर्सिटी में दाखिला

भीमराव अंबेडकर को बड़ौदा राज्य सरकार ने अपने राज्य में रक्षा मंत्री बना दिया. लेकिन यहां पर भी छुआछूत की बीमारी ने उनका पीछा नहीं छोड़ा और उन्हें कई बार निरादर का सम्मान करना पड़ा था.

लेकिन उन्होंने लंबे समय तक इसमें काम नहीं किया क्योंकि उन्हें उनकी प्रतिभा के लिए बड़ौदा राज्य छात्रवृत्ति से सम्मानित किया गया था. जिससे उन्होंने न्यूयॉर्क शहर में कोलंबिया विश्वविद्यालय में पोस्ट ग्रेजुएट की डिग्री हासिल करने का मौका मिला. अपनी पढ़ाई आगे जारी रखने के लिए वे 1913 में अमेरिका चले गए. BhimRao Ambedkar Biography Hindi

साल 1915 में अंबेडकर जी ने अमेरिका के कोलंबिया विश्वविद्यालय से समाजशास्त्र, इतिहास, दर्शन शास्त्र और मानव विज्ञान के साथ अर्थशास्त्र में m.a. की मास्टर डिग्री हासिल की. वर्ष 1916 में कोलंबिया विश्वविद्यालय अमेरिका से ही उन्होंने पीएचडी की उपाधि प्राप्त की, उनके पीएचडी शोध का विषय ब्रिटिश भारत में प्रांतीय वित्त का विकेंद्रीकरण था.

BhimRao Ambedkar लंदन स्कूल ऑफ़ इकोनॉमिक्स एंड पॉलीटिकल साइंस

फेलोशिप खत्म होने पर उन्हें भारत लौटना पड़ा था. वे ब्रिटेन होते हुए भारत वापस लौट रहे थे. तभी उन्होंने वहां लंदन स्कूल ऑफ़ इकोनॉमिक्स एंड पॉलीटिकल साइंस में एमएससी और डीएससी और विधि संस्थानों में बार ऐड लॉ की उपाधि के लिए अपना रजिस्ट्रेशन करवाया और फिर भारत लौटे.

भारत लौटने पर उन्होंने सबसे पहले स्कॉलरशिप की शर्त के मुताबिक बड़ौदा के राजा के दरबार में सैनिक अधिकारी और वित्तीय सलाहकार का दायित्व स्वीकार किया. उन्होंने राज्य के रक्षा सचिव के रूप में काम किया.

हालांकि उनके लिए यह काम इतना आसान नहीं था, क्योंकि जातिगत भेदभाव और छुआछूत की वजह से उन्हें काफी पीड़ा सहनी पड़ी थी. यहां तक कि पूरे शहर में उन्हें किराए का मकान देने के लिए कोई भी तैयार नहीं था.

इसके बाद भीमराव अंबेडकर ने सैन्य मंत्री की नौकरी छोड़ दी, एक निजी शिक्षक और अकाउंटेंट की नौकरी ज्वाइन कर ली. यहां पर उन्होंने कंसल्टेंसी बिजनेस भी स्थापित किया लेकिन यहां भी छुआछूत की बीमारी ने पीछा नहीं छोड़ा और समाज की स्थिति की वजह से उनका यह बिजनेस भी बर्बाद हो गया.

आखरी में वेब मुंबई वापस लौट गए और जहां उनकी मुंबई गवर्नमेंट ने की और वे मुंबई के सिडेनहम में हम कॉलेज ऑफ कॉमर्स एंड इकोनॉमिक्स में राजनीति शास्त्र के प्रोफेसर बन गए. इस दौरान उन्होंने अपने आगे की पढ़ाई के लिए पैसे इकट्ठे किए और अपनी पढ़ाई जारी रखने के लिए साल 1920 में एक बार फिर वह भारत के बाहर इंग्लैंड चले गए. BhimRao Ambedkar Biography Hindi

वर्ष 1921 में उन्होंने लंदन स्कूल ऑफ़ इकोनॉमिक्स एंड पॉलीटिकल साइंस में मास्टर डिग्री हासिल की और 2 साल बाद उन्होंने अपना डी एस सी की डिग्री प्राप्त की.

आपको बता दें कि डॉक्टर भीमराव अंबेडकर ने बोर्न, जर्मनी विश्वविद्यालय में भी पढ़ाई के लिए कुछ महीने गुजारे. साल 1927 में उन्होंने अर्थशास्त्र में डीएससी किया. कानून की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने ब्रिटिश बार में बैरिस्टर के रूप में काम किया. 8 जून 1927 को उन्हें कोलंबिया विश्वविद्यालय द्वारा डॉक्टरेट से सम्मानित किया गया था.

छुआछूत और जातिगत भेदभाव, और छुआछूत मिटाने की लड़ाई – दलित आंदोलन – Dalit Movement

भारत लौटने पर, उन्होंने देश में जातिगत भेदभाव के खिलाफ लड़ने का फैसला लिया जिसकी वजह से उन्हें कई बार निरादर और अपने जीवन में इतना कष्ट सहना पड़ा था. अंबेडकर जी ने देखा कि छुआछूत और जातिगत भेदभाव किस तरह देश को बिखेर रहे हैं.

अब तक छुआछूत की बीमारी काफी गंभीर हो चुकी थी जिसे देश से बाहर निकालना ही अंबेडकर जी ने अपना कर्तव्य समझा और इसी वजह से उन्होंने इसके खिलाफ मोर्चा खड़ा किया.

साल 1919 में, भारत सरकार अधिनियम की तैयारी के लिए दक्षिण बोरो समिति से पहले अपनी गवाही में अंबेडकर ने कहा था कि अछूतों और अन्याय हर्षित समुदायों के लिए अलग निर्वाचन प्रणाली होनी चाहिए. उन्होंने दलितों और अन्य धार्मिक संस्कारों के लिए आरक्षण का हक दिलवाने का प्रयास भी रखा.

जातिगत भेदभाव के खत्म करने को लेकर अंबेडकर ने लोगों तक अपनी पहुंच बनाने और समाज में फैली बुराइयों को समझने के तरीकों की खोज शुरू कर दी. जातिगत भेदभाव को खत्म करने और छुआछूत मिटाने के अंबेडकर जी के जुलूस से उन्होंने ‘बहिष्कृत हिताकरनी सभा’ को खोज निकाला. आपको बता दें कि इस संगठन का मुख्य उद्देश पिछड़े वर्ग में शिक्षा और सामाजिक आर्थिक सुधार करना था.

इसके बाद वर्ष 1920 में उन्होंने कल का पूर्व के महाराज शहाजी द्वितीय की सहायता से ‘ मूकनायक’ सामाजिक पत्र की स्थापना की. अंबेडकर जी के इस कदम से पूरे देश के सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्र में हलचल पैदा कर दी थी. इसके बाद से लोगों ने भीमराव अंबेडकर को जानना भी शुरू कर दिया था.

डॉक्टर भीमराव अंबेडकर ने ग्रे के इन मैप बार कोर्स पूरा करने के बाद अपना कानून काम करना शुरू कर दिया और उन्होंने जातिगत भेदभाव के मामलों की वकालत करने वाले विवादित कौशलों को लागू किया और जातिगत भेदभाव करने का आरोप ब्राह्मणों पर लगाया.

जातिगत भेदभाव के कई गैर ब्राह्मण नेताओं के लिए लड़ाइयां लड़ी और सफलता हासिल की इन्हीं शानदार जीत की बदौलत उन्हें दलितों के उत्थान के लिए लड़ाई लड़ने के लिए आधार मिला.

आपको बता दें कि वर्ष 1927 में डॉक्टर भीमराव अंबेडकर ने छुआछूत मिटाने और जातिगत भेदभाव को पूरी तरह से खत्म करने के लिए सक्रिय रूप से काम किया. इसके लिए उन्होंने हिंसा का मार्ग अपनाने के बजाय, महात्मा गांधी के पद चिन्हों पर चलें और दलितों के अधिकार के लिए पूर्ण गति से आंदोलन की शुरुआत की.

यही नहीं उन्होंने महाराष्ट्र के नासिक में कलाराम मंदिर में घुसने के लिए भेदभाव की वकालत करने के लिए हिंदुत्व वादियों की जमकर निंदा की और प्रतीकात्मक प्रदर्शन किया.

साल 1932 में दलितों के अधिकारों के रक्षा हेतु डॉ भीमराव अंबेडकर की लोकप्रियता बढ़ती चली गई और उन्होंने लंदन के गोलमेज सम्मेलन में हिस्सा लेने का निमंत्रण भी मिल गया. हालांकि इस सम्मेलन में दलितों के मसीहा अंबेडकर जी ने महात्मा गांधी के विचारधारा का विरोध भी किया जिन्होंने एक अलग मतदाता के खिलाफ आवाज उठाई थी जिसकी उन्होंने दलितों के चुनाव में हिस्सा बनने की मांग की थी.

इसके बाद में वे गांधीजी के विचारों को समझ गए जिसे पुणे संधि भी कहा जाता है जिसके मुताबिक एक विशेष मतदाता की वजह क्षेत्रीय विधि विधान सभा और राज्य की केंद्र परिषद में दलित वर्ग को आरक्षण दिया गया था.

आपको बता दें कि पुणे संधि पर डॉक्टर भीमराव अंबेडकर और ब्राह्मण समाज के प्रतिनिधित्व करने वाले पंडित मोहन मालवीय के बीच सामान्य मतदाताओं के अंदर अस्थाई विधानसभाओं के दलित वर्गों के लिए सीटों के आरक्षण के लिए पुणे संधि पर भी हस्ताक्षर किए गए थे.

वर्ष 1935 में अंबेडकर को सरकारी लॉ कॉलेज का प्रधानाचार्य नियुक्त किया गया और इस पद पर उन्होंने 2 साल तक काम किया. इसके चलते अंबेडकर मुंबई में बस गए, उन्होंने यहां एक बड़ा घर का निर्माण कराया, जिसमें उनकी निजी पुस्तकालय में 50000 से भी ज्यादा किताबें नहीं थी.

Political Career of BhimRao Ambedkar – भीमराव अंबेडकर जी का राजनीतिक जीवन

डॉक्टर भीमराव अंबेडकर जी ने साल 1936 में स्वतंत्र लेबर पार्टी की स्थापना की. इसके बाद 1937 में केंद्रीय विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी ने 15 सीटों से जीत हासिल की.

उस साल 1937 में अंबेडकर जी ने अपनी पुस्तक ‘दी एनीहिलेशन ऑफ कास्ट’ भी प्रकाशित की जिसमें उन्होंने हिंदू रूढ़िवादी नेताओं की कठोर निंदा की और देश में प्रचलित जाति व्यवस्था की भी निंदा की थी.

इसके बाद उन्होंने एक और पुस्तक प्रकाशित की थी ‘Who Were the Shudras’ ( कौन थे शूद्र) जिसमें उन्होंने दलित वर्गों के गठन की बारे में व्याख्या किया था.

15 अगस्त, 1947 में भारत, अंग्रेजों की हुकूमत से जैसे ही आजाद हुआ, वैसे ही उन्होंने अपनी राजनीतिक पार्टी स्वतंत्र लेबर पार्टी को अखिल भारतीय अनुसूचित जाति संघ कास्ट पार्टी में बदल दिया. हालांकि, अंबेडकर जी की पार्टी 1946 में हुए भारत के संविधान सभा के चुनाव में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाई थी. BhimRao Ambedkar Biography Hindi

इसके बाद कांग्रेस और महात्मा गांधी ने दलित वर्ग को हरिजन नाम दे दिया. जिससे दलित जाति हरिजन के नाम से भी जाने जाने लगी. लेकिन अपने इरादों के मजबूत और भारतीय समाज से छुआछूत हमेशा के लिए मिटाने वाले अंबेडकर जी को गांधी जी का दिया गया हरिजन नाम नागवार गुजरा और उन्होंने इस बात का जमकर विरोध किया.

उनका कहना था कि ” अछूत समाज के सदस्य भी हमारे समाज का हिस्सा है, और बेबी समाज के अन्य सदस्यों की तरह ही एक साधारण इंसान है.”

इसके बाद डॉ भीमराव अंबेडकर जी को वायसराय एग्जीक्यूटिव काउंसिल में श्रम मंत्री और रक्षा सलाहकार नियुक्त किया गया. अपने त्याग और संघर्ष और समर्पण के बल पर वे आजाद भारत के पहले लॉ मिनिस्टर बने. दलित होने के बावजूद भी डॉक्टर भीमराव अंबेडकर जी का मंत्री बनना उनके जीवन को किसी बड़ी उपलब्धि से कम नहीं थी.

भारतीय संविधान के शिल्पकार डॉक्टर भीमराव अंबेडकर – Constitution of India

डॉक्टर भीमराव अंबेडकर का संविधान के निर्माण में मुख्य उद्देश्य देश में जातिगत भेदभाव और छुआछूत को जड़ से खत्म करना था. एक छुआछूत मुक्त समाज का निर्माण कर समाज में क्रांति लाना था. साथ ही सभी को समानता का अधिकार दिलाना था.

भीमराव अंबेडकर जी को 29 अगस्त, 1947 को संविधान के मसौदा समिति के अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया गया. अंबेडकर जी ने समाज के सभी वर्गों के बीच एक वास्तविक पुल का निर्माण पर जोर दिया.

भीमराव अंबेडकर के मुताबिक अगर देश के अलग-अलग वर्गों के अंतर को कम नहीं किया गया तो देश की एकता बनाए रखना मुश्किल होगा. इसके साथ ही उन्होंने धार्मिक, लिंग और जाति समानता पर खास जोर दिया.

भीमराव अंबेडकर साहब शिक्षा, सरकारी नौकरियों और सिविल सेवाओं में अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के सदस्य के लिए आरक्षण शुरू करने के लिए विधानसभा का समर्थन हासिल करने में भी सफल रहे.

  • भारतीय संविधान में भारत के सभी नागरिकों को धर्म की स्वतंत्रता का अधिकार दिया.
  • छुआछूत को जड़ से खत्म किया.
  • महिलाओं को अधिकार दिलवाए.
  • समाज के वर्गों के बीच में फैले अंतर को खत्म किया.

आपको बता दें कि भीमराव अंबेडकर जी ने समानता, समता, बंधुत्व एवं मानवता आधारित भारतीय संविधान को करीब 2 साल, 11 महीने और 7 दिन की कड़ी मेहनत से 26 नवंबर 1949 को तैयार कर तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद को सौंपकर देश के सभी नागरिकों को राष्ट्रीय एकता, अखंडता और व्यक्ति की गरिमा की जीवन पद्धति से भारतीय संस्कृति को अभिभूत किया है. BhimRao Ambedkar Biography Hindi

संविधान के निर्माण में अपनी भूमिका के अलावा उन्होंने भारत के वित्त आयोग की स्थापना में भी मदद की. आपको बता दें कि उन्होंने अपनी नीतियों के माध्यम से देश आर्थिक और सामाजिक स्थिति में बदलाव कर प्रगति की है. इसके साथ ही उन्होंने स्थिर अर्थव्यवस्था के साथ मुक्त अर्थव्यवस्था पर भी जोर दिया.

वे निरंतर महिलाओं की स्थिति में भी सुधार करने के लिए प्रयासरत रहे. भीमराव अंबेडकर जी ने साल 1951 में, महिला सशक्तिकरण का हिंदू संहिता विधेयक पारित करवाने की भी कोशिश की और इसके पारित नहीं होने पर उन्होंने स्वतंत्र भारत के प्रथम कानून मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया.

इसके बाद भीमराव अंबेडकर जी ने लोकसभा में सीट के लिए चुनाव भी लड़ा लेकिन वे इस चुनाव में हार गए. बाद में उन्हें राज्यसभा में नियुक्त किया गया जिसके बाद उनकी मृत्यु तक वह इस के सदस्य बने रहे थे.

साल 1955 में उन्होंने अपना ग्रंथ भाषाई राज्य पर विचार प्रकाशित कर आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र को छोटे-छोटे और प्रबंधन योग्य राज्यों में पुनर्गठित करने का प्रस्ताव दिया था. जो उसके 45 सालों बाद कुछ प्रदेशों में साकार हुआ है.

डॉक्टर भीमराव अंबेडकर जी ने निर्वाचन आयोग, योजना आयोग, वित्त आयोग, महिला पुरुष के लिए समान नागरिक हिंदू संहिता, राज्य पुनर्गठन, बड़े आकार के राज्यों को छोटे आकार में संगठित करना, राज्य के नीति निदेशक तत्व, मौलिक अधिकार, मानव अधिकार, ऑडिटर जनरल, निर्वाचन आयुक्त और राजनीतिक ढांचे को मजबूत बनाने वाली सशक्त सामाजिक आर्थिक, शैक्षणिक एवं विदेश नीतियां भी बनाई.

यही नहीं डॉक्टर भीमराव अंबेडकर ने अपने जीवन में लगातार कोशिश करते रहे और उन्हें अपने कठिन संघर्ष और प्रयासों के माध्यम से प्रजातंत्र को मजबूती देने राज्य के तीनों अंगों न्यायपालिका, कार्यपालिका एवं विधायिका को स्वतंत्र और अलग-अलग किया साथ ही समान नागरिक के अनुरूप एक व्यक्ति, एक मत और एक मूल्य के तत्व को प्रस्थापित किया.

इसके अलावा विलक्षण प्रतिभा के धनी भीमराव अंबेडकर जी ने विधायिका, कार्यपालिका एवं न्यायपालिका में अनुसूचित जाति एवं जनजाति के लोगों की सहभागिता भी संविधान द्वारा सुनिश्चित की और भविष्य में किसी भी प्रकार की विधायिकता जैसे ग्राम पंचायत, जिला पंचायत, पंचायती राज इत्यादि में सभा गीता का मार्ग प्रशस्त किया.

सहकारी और सामूहिक खेती के साथ-साथ उपलब्ध जमीन का राष्ट्रीयकरण कर भूमि पर राज्य का स्वामित्व स्थापित करने और सार्वजनिक प्राथमिक उद्यमों और बैंकिंग, बीमा आदि उपकरणों को राज्य नियंत्रण में रखने की पूरी जोर सिफारिश की और किसानों की छोटी ज्योति पर निर्भर बेरोजगार श्रमिकों को रोजगार के ज्यादा से ज्यादा अवसर प्रदान करने के लिए उन्होंने औद्योगिकरण के लिए भी काफी काम किया था. BhimRao Ambedkar Biography Hindi

डॉक्टर भीमराव अंबेडकर को मिले पुरस्कार एवं सम्मान – BhimRao Ambedkar Awards

  • डॉक्टर भीमराव अंबेडकर जी की स्मारक दिल्ली स्थित उनके घर 26 अलीपुर रोड में स्थापित की गई है.
  • अंबेडकर जयंती पर सार्वजनिक अवकाश रखा जाता है.
  • वर्ष 1990 में उन्हें मरणोपरांत भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया है.
  • कई सौ जनिक संस्थान का नाम उनके सम्मान में उनके नाम पर रखा गया है जैसे कि हैदराबाद, आंध्र प्रदेश का डॉक्टर अंबेडकर मुक्त विश्वविद्यालय, बी आर अंबेडकर बिहार विश्वविद्यालय मुजफ्फरपुर.
  • डॉ बाबासाहेब आंबेडकर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा नागपुर में है, जो पहले सोनेगांव हवाई अड्डा के नाम से जाना जाता था.
  • अंबेडकर का एक बड़ा आधिकारिक चित्र भारतीय संसद भवन में भी प्रदर्शित किया गया है.

डॉक्टर बाबा साहब भीमराव अंबेडकर से जुड़े कुछ रोचक तथ्य – Interesting fact about BhimRao Ambedkar

  • भीमराव अंबेडकर अपने माता पिता के 14 वी संतान और आखरी बच्चे थे.
  • डॉक्टर भीमराव अंबेडकर का मूल नाम अंबा वाडेकर था. लेकिन उनके शिक्षक, महादेव अंबेडकर जो उन्हें बहुत मानते थे, ने स्कूल रिकार्ड्स में उनका नाम अंबा वाडेकर से अंबेडकर कर दिया.
  • बाबा साहब मुंबई के गवर्नमेंट लॉ कॉलेज में 2 साल तक प्रिंसिपल पद पर कार्यरत रहे थे.
  • डॉक्टर भीमराव अंबेडकर की शादी वर्ष 1906 मैं 9 साल की रमाबाई से कर दी गई थी. वही 1908 में वे एलफिंस्टन कॉलेज में दाखिला लेने वाले पहले दलित बच्चे बने.
  • डॉक्टर भीमराव अंबेडकर को 9 भाषाएं आती थी उन्होंने 21 साल तक सभी धर्मों की पढ़ाई भी की थी.
  • डॉक्टर भीमराव अंबेडकर के पास कुल 32 डिग्रियां थी. वह विदेश जाकर अर्थशास्त्र में पीएचडी करने वाले पहले भारतीय भी बने. आपको बता दें कि नोबेल प्राइज जीतने वाले अमर्त्य सेन अर्थशास्त्र में इन्हें अपना पिता मानते थे.
  • भीमराव अंबेडकर पेशे से वकील थे. वे 2 सालों तक मुंबई के सरकारी लॉ कॉलेज के प्रिंसिपल भी थे.
  • डॉक्टर भीमराव अंबेडकर भारतीय संविधान की धारा 370, ( जो जम्मू और कश्मीर को विशेष दर्जा देता है) के खिलाफ में थे.
  • बाबासाहेब आंबेडकर विदेश जाकर के अर्थशास्त्र डॉक्टरेट की डिग्री हासिल करने वाले पहले भारतीय थे.
  • डॉक्टर अंबेडकर एकमात्र ऐसे भारतीय है जिनकी पोट्रेट लंदन संग्रहालय में कार्ल मार्क्स के साथ में लगाई गई है.
  • इंडियन फ्लैग में अशोक चक्र को जगा देने का श्रेय भी डॉक्टर भीमराव अंबेडकर को जाता है.
  • बाबा साहब भीमराव अंबेडकर को किताबें पढ़ने का बड़ा शौक था, माना जाता है कि उनकी पर्सनल लाइब्रेरी दुनिया की सबसे बड़ी व्यक्तिगत लाइब्रेरी थी. जिसमें 50000 से अधिक पुस्तकें थी.
  • डॉक्टर भीमराव अंबेडकर बाद के सालों में डायबिटीज से बुरी तरह ग्रस्त थे.
  • डॉक्टर भीमराव अंबेडकर दो बार लोकसभा चुनाव लड़े थे लेकिन दोनों ही बार वे हार गए थे.

डॉक्टर भीमराव – BhimRao Ambedkar Biography Hindi अंबेडकर जी का समाज के लिए किए गए अनगिनत योगदान के लिए उन्हें हमेशा याद किया जाएगा. उन्होंने उस समय दलितों की हक के लिए लड़ाई लड़ी जब दलितों को अछूता मानकर उनका अपमान किया जाता था. खुद भी उनके दलित होने की वजह से उन्हें कई बार निरादर का सामना करना पड़ा लेकिन वे कभी हिम्मत नहीं हारे और विपरीत परिस्थितियों में उन्होंने खुद को और भी ज्यादा मजबूत बना लिया और सामाजिक और आर्थिक रूप से देश की प्रगति में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया जिसके लिए वे हमेशा याद किए जाएंगे.

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