John Napier Biography Hindi – जॉन नेपियर की जीवनी

John Napier Biography Hindi – जॉन नेपियर की जीवनी. गणितज्ञ और लॉग्र्रिदम प्रणाली के जनक जॉन नेपियर का जन्म एडिनबर्ग के पास मार्किस्टन मे वर्ष 1550 में हुआ था. उनका परिवार एक जमींदार था. जॉन नेपियर की प्रारंभिक शिक्षा फ्रांस में हुई थी. इसके बाद वह पढ़ने के लिए एंड्रयू चले गए. सारी पढ़ाई उनकी विदेश में हुई, पर डिग्री के बारे में ज्ञात नहीं है.

इसके बाद वे अपने गृह नगर लौट आए और साल 1571 में उन्होंने विवाह कर लिया. उन्हें अपनी पैतृक जायदाद बहुत ज्यादा मिली थी. इसी बीच में वे लगातार कृषि संबंधी कार्य में लगे रहे. साथ में वह अपना समय धार्मिक विवादों, गणित एवं युद्ध संबंधी उपकरण तैयार करने में लगाते थे.

आज के हमारे इस, लेख में हम पढ़ेंगे महान जॉन नेपियर – John Napier Biography Hindi – जॉन नेपियर की जीवनी, जिन्होंने लॉग्र्रिदम और गणित में अभूतपूर्व योगदान दिया है.

John Napier Biography Hindi – जॉन नेपियर की जीवनी

जॉन नेपियर अपने अध्ययनों एवं अनुसंधानओं को उन्होंने क्रमबद्ध भी किया है. साल 1596 में उन्होंने एक प्रमुख राजनीतिक हस्ती एंथनी बेकस को अपनी पांडुलिपि भेजी, जिसमें अपने विकसित उन गोपनीय अविष्कारों एवं उपकरणों का वर्णन उन्होंने किया था. जो एक द्वीप की सुरक्षा के लिए आवश्यक भी थे और लाभदायक भी.

उनका मानना था कि इनकी सहायता से अजनबीयों, ईश्वर के सत्य एवं धर्म विरोधी से निपटा जा सकता है. इस पांडुलिपि में जला देने वाली दर्पण, तोपों के गोले, आधुनिक टैगो जैसे वाहनों का वर्णन मिलता है.

जॉन नेपियर- John Napier Biography Hindi – जॉन नेपियर की जीवनी. को उनके लॉग्र्रिदम अर्थात लघु गुणांक प्रणाली के विकास के लिए मुख्यता जाना जाता है. अपने पहले विवाह के पश्चात उन्होंने गणित की इस शाखा के बारे में अध्ययन करना आरंभ किया था. इस अध्ययन के दौरान उन्होंने गणित की अन्य विधाओं का भी अध्ययन किया. उनका संख्या प्रणाली संबंधी अध्ययन अत्यंत महत्वपूर्ण था.

उनके धर्म विरोधी कार्यो और इस कारण उपज ने वाले विवादों के कारण उपयुक्त अनुसंधान कार्यों में काफी बाधाएं आई. फिर भी साल 1594 तक उन्होंने लॉग्र्रिदम का मौलिक सिद्धांत विकसित कर लिया था.

आने वाले समय में वह लगातार इसकी उपयोगिता बढ़ाते रहे. उन्होंने इसके प्रयोग के लिए सराहनीय एवं खुद को तैयार किया था. इस पूरे प्रकरण में उन्होंने वर्तमान दशमलव प्रणाली का भी अध्ययन किया. साल 1664 में जॉन नेपियर का लॉग्र्रिदम संबंधी कार्य प्रकाशित हुआ. इससे सारणी भी थी और उनके प्रयोग की विधियां भी समझाई गई थी. गणित के विभिन्न विद्या में इनका प्रयोग किस प्रकार हो सकेगा इन सारी चीजों के बारे में उन्होंने बतलाया था.

विशेष बात यह भी थी कि लॉग्र्रिदम की प्रकृति को समझने के लिए उचित उदाहरण का प्रयोग किया गया था. जैसे सरल रेखा में बिंदु किस प्रकार आगे बढ़ती है. उसी प्रकार की विधियां समझाई गई थी. उस समय लॉग्र्रिदम की कृतिम संख्या कहा जाता था. तत्कालीन विद्वान इस से अत्यंत प्रभावित थे और यह नहीं समझ पा रहे थे कि इस पूरी विधि को विकसित करने का सुराग आखिर उन्होंने कहा से पाया होगा.

जो भी हो विधि पर आधारित उनकी पुस्तक का तत्काल अंग्रेजी में अनुवाद किया गया. जो वर्ष 1615 में प्रकाशित की गई थी. तत्कालीन गणितज्ञ ब्रिक्स, राइट आदि उनसे मिलने आए. उन्होंने इस विषय पर गहन चर्चा की कि किस प्रकार लॉग्र्रिदम के बेस को बेहतर एवं सुविधाजनक बनाया जाए. John Napier Biography Hindi Inspirational Story.

कुशाग्र बुद्धि वाले जॉन नेपियर इस संभावना पर पहले से ही चिंतन कर चुके थे. उन्होंने समझ लिया था कि इसके लिए पुनः गणना करके सारणी को तैयार करना होगा. नेपियर से चर्चा के पश्चात ब्रिक्स ने दसमलाव आधारित वाली लॉग्र्रिदम सारणी को तैयार करना शुरू किया. पर जॉन नेपियर के जाने के बाद ही साल 1617 और साल 1624 में प्रकाशित हो पाई. बाद में प्राकृतिक या नेपोलियन लॉग्र्रिदम विकसित हुई. जो मूल निपेरियन लॉग्र्रिदम से एकदम अलग थी पर उन्हीं के नाम से प्रयोग होती रही.

हालांकि जॉन नेपियर अपनी लघुगणक प्रणाली के लिए ही लोकप्रिय हैं पर उन्होंने अपने जीवन काल में नंबर योग छेड़े भी विकसित की, जो नेपियर बोन कहलाती है. यह तरीका काफी लोकप्रिय हुआ, पर गणितीय रोचकता इसमें नहीं थी.

उन्होंने वह विधि भी निकाली, जिससे चेस बोर्ड पर काउंटर की गतिविधियों से गुणा करना, भाग करना, वर्गमूल निकालना आदि किया जा सकता था. त्रिकोणमिति के अनेक नियमों को नेपियर के नियमों के रूप में जाना जाता है.

नेपियर – John Napier Biography Hindi – जॉन नेपियर की जीवनी. के योगदान से तत्कालिक विविधता समाज एवं वैज्ञानिक समाज में धूम मच गई थी. उनकी लघुगनक प्रणाली का बड़े पैमाने पर उपयोग खगोलीय गणनाओ मैं होने लगा था. क्या प्लान है इसके प्रचार-प्रसार में काफी योगदान किया था.

जॉन नेपियर अति परिश्रमी व्यक्ति थे. उन्होंने अपने काम में लंबा समय लगाया और ऐसी प्रणाली तैयार की, जिससे शुद्ध एवं सटीक परिणाम आता था. शताब्दियों तक उनके कार्य का बड़े पैमाने पर उपयोग होता रहा और आज भी हो रहा है. पर इस प्रणाली में किसी व्यापक संशोधन की आवश्यकता नहीं पड़ी. जीवन भर धर्म में तर्कसंगत बातों का विरोध करने वाले जॉन नेपियर ने पहली पत्नी के निधन के पश्चात दूसरा विवाह किया था. उन्होंने यूरोप की दूरी यात्रा भी की थी. 4 अप्रैल 1617 को इस महान गणितज्ञ का निधन हो गया.

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