Mahatma Gandhi Biography Hindi – महात्मा गांधी की जीवनी

Mahatma Gandhi Biography Hindi – महात्मा गांधी की जीवनी – जब भी हम अपने देश भारत का नाम लेते हैं. तब हम भारत के इतिहास की बात करते हैं, तो स्वतंत्रता संग्राम की बात जरूर होती है. स्वतंत्रता संग्राम में किन-किन सेनानियों ने अपना योगदान दिया. उन पर भी अवश्य चर्चाएं होती है. भारत के स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के बारे में हमने किताबों में काफी पढ़ा होगा.

Mahatma Gandhi Biography Hindi
महात्मा गांधी के अनमोल विचार

इसलिए हम अवश्य ही Mahatma Gandhi Biography Hindi – महात्मा गांधी की जीवनी के जीवन के बारे में थोड़ी बहुत जानकारी तो अवश्य ही रखते हैं. आज के हमारे इस लेख में हम महात्मा गांधी के जीवन के बारे में जानेंगे.

स्वतंत्रता संग्राम के दौरान भारतीय स्वतंत्रता सेनानियों को दो श्रेणी में बांटा गया था. जिसे आप गरम दल और नरम दल के रूप में विभाजित कर सकते हैं.

गरम दल के सेनानी :- गरम दल के सेनानी अंग्रेजों द्वारा किए जाने वाले अत्याचारों का जवाब उन्हीं की तरह खून खराबा करके देना चाहते थे. इनमें प्रमुख थे चंद्रशेखर आजाद, सरदार भगत सिंह आदि.

नरम दल के सेनानी :- इसके अंतर्गत वैसे सेनानी आते थे जो इस खूनी मंजर के वजह शांति की राह पर चलकर के देश को स्वतंत्रता दिलाना चाहते थे. इसमें निम्नलिखित प्रमुख नेता थे, महात्मा गांधी, सरदार वल्लभभाई पटेल, इत्यादि.

महात्मा गांधी (Mahatma Gandhi) शांति, सत्य और अहिंसा का पालन करके देश को आजाद करना चाहते थे. यही वजह है कि इन्हें ‘ महात्मा’ की उपाधि से सम्मानित और संबोधित किया गया. आज के हमारे इस लेख में हम महात्मा गांधी – Mahatma Gandhi Biography Hindi – महात्मा गांधी की जीवनी के बारे में चर्चा करने वाले हैं.

Mahatma Gandhi Biography Hindi – महात्मा गांधी की जीवनी

Mahatma Gandhi Biography Hindi – महात्मा गांधी की जीवनी -महात्मा गांधी का जन्म भारत के गुजरात राज्य के पोरबंदर क्षेत्र में हुआ था. उनके पिता का नाम श्री करमचंद गांधी था. जो पोरबंदर के ‘ दीवान’ हुआ करते थे. उनकी माता का नाम पुतलीबाई था. जो कि एक धार्मिक महिला थी. महात्मा गांधी के जीवन में उनकी माता का बहुत अधिक प्रभाव रहा. उनका विवाह मात्र 13 वर्ष की आयु में हो गया था और उस समय उनकी पत्नी कस्तूरबा 14 वर्ष की थी.

नवंबर सन 1887, मे उन्होंने अपनी मैट्रिक की परीक्षा उत्तीर्ण कर ली थी. वर्ष 1988 में उन्होंने भावनगर के समलदास कॉलेज में दाखिला लिया और वही से डिग्री प्राप्त की. इसके बाद वे लंदन चले गए और वहां से उन्होंने बैरिस्टर की डिग्री हासिल की.

महात्मा गांधी का संक्षिप्त जीवन परिचय

जीवन परिचय
नाम - मोहन दास करमचंद गांधी
पिता का नाम - करमचंद गांधी
माता का नाम - पुतलीबाई
जन्मतिथि - 2 अक्टूबर, 1869
राष्ट्रीयता - भारतीय
शैक्षणिक योग्यता - बैरिस्टर की डीग्री लंदन से हासिल की
पत्नी का नाम - कस्तूरबा गांधी
संतान बेटा बेटी का नाम - 4 पुत्र, हीरालाल, मणिलाल, रामदास और देवदास
मृत्यु - 30 जनवरी 1948
हत्यारे का नाम - नाथूराम गोडसे

महात्मा गांधी की दक्षिण अफ्रीका की यात्रा

वार्ड 1894 में किसी कानूनी विवाद के संबंध में गांधीजी दक्षिण अफ्रीका गए थे और वहां होने वाले अन्याय के खिलाफ ‘ अवज्ञ आंदोलन’ (Disobedience Movement) चलाया और इसके पूर्ण होने के बाद ही भारत लौटे थे.

महात्मा गांधी का भारत आगमन और स्वतंत्रता संग्राम में भाग

वर्ष 1916 मे महात्मा गांधी दक्षिण अफ्रीका से भारत वापस लौटे और फिर हमारे देश की आजादी के लिए अपना कदम उठाना शुरू किया. वर्ष 1920 में कांग्रेस लीडर बाल गंगाधर तिलक की मृत्यु के बाद गांधीजी ही कांग्रेस के मार्गदर्शक बन गए थे.

वर्ष 1914 से लेकर वर्ष 1919 के बीच में जो प्रथम विश्व युद्ध हुआ था. उसमें गांधी जी ने ब्रिटिश सरकार को इस शर्त पर पूर्ण सहयोग दिया कि इसके बाद वे भारत को आजाद कर देंगे. लेकिन, जब अंग्रेजों ने ऐसा नहीं किया तो फिर गांधी जी ने देश को आजादी दिलाने के लिए बहुत से आंदोलन चलाए. इन आंदोलन में से कुछ प्रमुख आंदोलन है:-

  • वर्ष 1920 में :- असहयोग आंदोलन
  • वर्ष 1930 में :- अवज्ञा आंदोलन
  • वर्ष 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन

वैसे तो महात्मा गांधी जी का संपूर्ण जीवन ही आंदोलन की तरह रहा था. लेकिन, उनके द्वारा मुख्य रूप से पांच आंदोलन चलाए गए जिनमें से तीन आंदोलन संपूर्ण राष्ट्र में चलाए गए थे. यह आंदोलन सफल हुए और इसी लिए लोग इनके बारे में जानकारी भी रखते हैं. आंदोलन को हम निम्नलिखित वर्गों में वर्गीकृत कर सकते हैं.

महात्मा गांधी के प्रमुख आंदोलनअन्य आंदोलन/ प्रारंभिक चरण के आंदोलन
वर्ष 1920 मेंअसहयोग आंदोलन (Non Co-Operation Movement)
वर्ष 1930 मेंअवज्ञा आंदोलन/ नमक सत्याग्रह आंदोलन/ दांडी यात्रा (Civil Disobedience Movement/Salt Satyagrah/Dandi March)
सन 1918 मेंचंपारण और खेड़ा सत्याग्रह
सन 1919 मेंखिलाफत आंदोलन (Khilafat Movement)
वर्ष 1942 मेंभारत छोड़ो आंदोलन (Quit India Movement)

इन सभी आंदोलन के बारे में हम नीचे विस्तृत से जानकारी लेंगे.

वर्ष 1918 :- चंपारण और खेड़ा सत्याग्रह

गांधी जी द्वारा वर्ष 1918 में चंपारण और खेड़ा सत्याग्रह चलाया गया था. इस आंदोलन के जरिए गांधी जी ने भारत में आंदोलन की शुरुआत की थी. उनके द्वारा चलाया गया आंदोलन काफी हद तक सफल भी रही थी.

ब्रिटिश अधिकारी द्वारा भारतीय किसानों को नील (indigo) की पैदावार करने के लिए जोर डाला जा रहा था. इसी के साथ आज तो यह थी कि उन्हें यह नील एक निश्चित कीमत पर ही बेचने के लिए भी विवश किया जा रहा था और भारतीय किसानों द्वारा ऐसा नहीं करने पर उन्हें सजा दी जाती थी. इस पर गांधीजी ने एक अहिंसात्मक आंदोलन चलाया और इस में सफल रहे और अंग्रेजों को उनकी बात माननी पड़ी थी.

इसी वर्ष खेड़ा नामक एक गांव, जो गुजरात प्रांत में स्थित है. वहां बाढ़ आ गई और वहां के किसान भीटी सरकार द्वारा लगाए जाने वाले जुर्माना एवं टैक्स भरने में सक्षम हो गए थे. उन्होंने इसके लिए गांधीजी से सहायता मांगी. गांधी जी द्वारा ‘ असहयोग आंदोलन’ जैसे हथियार का प्रयोग किया और किसानों को टैक्स में छूट दिलाने के लिए आंदोलन किया.

महात्मा गांधी द्वारा चलाए गए इस आंदोलन को जनता का काफी समर्थन मिला. आखिरकार मई 1918 को ब्रिटिश सरकार को अपने टैक्स संबंधी नियमों किसानों को राहत देने की घोषणा करनी पड़ी थी.

वर्ष 1919 :- खिलाफत आंदोलन (Khilafat Movement)

वर्ष 1919 में गांधी जी को इस बात का एहसास होने लगा था कि कांग्रेस कहीं ना कहीं कमजोर पढ़ रही है. उन्होंने कांग्रेस की डूबती नैया को बचाने के लिए और साथ ही साथ हिंदू मुस्लिम एकता के द्वारा ब्रिटिश सरकार को बाहर निकालने के लिए अपना प्रयास शुरू कर दिया.

इन उद्देश्यों की पूर्ति के लिए हुए मुस्लिम समाज के पास गए. खिलाफत आंदोलन वैश्विक स्तर पर चलाया गया आंदोलन था. जो मुसलमानों के खलीफा के खिलाफ चलाया गया था. महात्मा गांधी ने संपूर्ण राष्ट्र के मुसलमानों की कांफ्रेंस रखी और वैसे इस कांफ्रेंस के प्रमुख व्यक्ति थे.

इस आंदोलन ने मुसलमानों को काफी सहयोग किया और गांधी जी के प्रयासों ने उन्हें राष्ट्रीय नेता बना दिया. कांग्रेस में उनकी खास जगह भी बन गई. लेकिन वर्ष 1922 में खिलाफत आंदोलन पूरी तरह से बंद हो गया और इसके बाद गांधी जी अपने संपूर्ण जीवन ‘ हिंदू मुस्लिम एकता‘ के लिए लड़ते रहे, परंतु हिंदू और मुस्लिम के बीच दूरियां बढ़ती ही चली गई.

वर्ष 1920 :- असहयोग आंदोलन (Non Co-operation Movement)

विभिन्न आंदोलन से निपटने के लिए अंग्रेज सरकार ने वर्ष 1919 में रौलट एक्ट (Rowlett Act) पारित किया. इसी दौरान गांधीजी द्वारा कुछ सभाएं भी आयोजित की गई थी. उन्हीं सभाओं की तरह ही अन्य जगहों पर भी सभाओं का आयोजन किया गया था.

इसी प्रकार की एक सभा पंजाब के अमृतसर में जलियांवाला बाग मैं बुलाई गई थी और वहां इस शांति सभा को अंग्रेज ने जिस बेरहमी के साथ रौंदा था. उसके विरोध में गांधी जी ने वर्ष 1920 में असहयोग आंदोलन आरंभ किया. इस असहयोग आंदोलन का अर्थ यह था कि भारतीयों द्वारा अंग्रेजी सरकार की किसी भी प्रकार से सहायता नहीं की जाएगी. लेकिन, इसमें किसी भी तरह की हिंसा नहीं होनी चाहिए.

आंदोलन की विस्तृत जानकारी

गांधी जी द्वारा नमक सत्याग्रह की शुरुआत 12 मार्च वर्ष 1930 को गुजरात के अहमदाबाद शहर के पास स्थित साबरमती आश्रम से किया गया था.

यह यात्रा 5 अप्रैल वर्ष 1930 तक गुजरात में ही स्थित दांडी नमक स्थान तक चली थी. यहां पहुंचकर गांधी जी ने नमक बनाया और यह कानून तोड़ा और इस प्रकार राष्ट्रव्यापी अवज्ञा आंदोलन(Civil Disobedience Movement) की शुरुआत की गई.

यह भारत के स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण चरण था. यह ब्रिटिश सरकार द्वारा नमक बनाए जाने के एकाधिकार पर सीधा प्रहार किया गया था. इस घटना के बाद यह आंदोलन संपूर्ण देश में फैलाया गया था. इसी समय अर्थात 26 जनवरी वर्ष 1930 को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने ‘ पूर्ण स्वराज‘ की भी घोषणा कर दी थी.

महात्मा गांधी ने दांडी यात्रा 24 दिनों में पूरी की और इस दौरान उन्होंने साबरमती से दांडी तक का लगभग 240 मील ( 390 किलोमीटर) की दूरी तय की थी. यहां उन्होंने बिना किसी टैक्स का भुगतान किए नमक बनाया.

जब महात्मा गांधी ने इस यात्रा की शुरुआत की थी उस समय उनके साथ मात्र 78 स्वयंसेवक थे लेकिन जब वे दांडी पहुंचे उनके साथ हजारों की संख्या में लोग जुड़ गए थे. यहां वे 5 अप्रैल सन 1930 को पहुंचे और यहां पहुंच कर उन्होंने इसी दिन सुबह 6:30 पर उन्होंने नमक बनाकर ब्रिटिश सरकार के खिलाफ अहिंसात्मक सबने आवाज आंदोलन की शुरुआत की और इसे भी हजारों भारतीयों ने मिलकर सफल बनाया था.

यहां नमक बनाकर महात्मा गांधी ने अपनी यात्रा जारी रखी और यहां से वेद दक्षिण की ओर के समुद्र तटों की ओर बढ़ते चले गए. इसके पीछे उनका उद्देश्य इन समुद्री तटों पर नमक बनाना तो था ही, साथ ही साथ में कई सभाओं को संबोधित करने का कार्य भी कर रहे थे.

यहां उन्होंने धरसाना नामक स्थान पर भी यह कानून तोड़ा था. 4 से 5 मई वर्ष 1930 अर्ध रात्रि को गांधीजी को गिरफ्तार कर लिया गया. उनकी गिरफ्तारी और इस सत्याग्रह ने पूरे विश्व का ध्यान भारत के स्वतंत्रता संग्राम की ओर खींचा था. यह सत्यग्रह पूरे वर्ष चला और गांधीजी को जेल से रिहाई के साथ ही खत भी मिला वह भी इसलिए क्योंकि दितीय गोलमेज सम्मेलन के समय वायसराय लॉर्ड इरविन नेगोशिएशन के लिए राजी हो गए थे.

नमक सत्याग्रह आंदोलन के दौरान लगभग 80,000 लोगों को गिरफ्तार किया गया था. गांधी जी द्वारा चलाए गए यह नमक सत्याग्रह उनके ‘ अहिंसात्मक विरोध’ किस सिद्धांत पर आधारित था.

इसका शाब्दिक अर्थ है – ‘ सत्याग्रह यानी कि सत्य का आग्रह‘ कांग्रेस ने भारत को स्वतंत्रता दिलाने के लिए सत्याग्रह को अपना हथियार बनाया और इसके लिए गांधी जी को प्रमुख नियुक्ति दी गई थी.

इसी के तहत धरासन में जो सत्याग्रह हुआ था, उसमें अंग्रेजी सैनिकों ने हजारों लोगों को मार दिया था. लेकिन इसमें गांधीजी के सत्याग्रह नीति कारगर सिद्ध हुई और अंग्रेजी सरकार को झुकना पड़ा था.

इस सत्याग्रह का अमेरिकन एक्टिविस्ट मार्टिन लूथर, जेम्स बेवन आदि पर बहुत ही गहरा प्रभाव पड़ा. जो वर्ष 1960 के समय में रंगभेद नीति ( काले और गोरे लोगों में भेदभाव) और अल्पसंख्यकों के अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे थे. जिस तरह से सत्याग्रह और अवज्ञ आंदोलन चल रहा था. तो, इसे सही मार्गदर्शन के लिए मद्रास में राजा गोपालाचारी और उत्तर भारत में खान अब्दुल गफ्फार खान को इसकी बागडोर सौंपी गई.

वर्ष 1942 :- भारत छोड़ो आंदोलन (Quit India Movement)

वर्ष 1940 के दशक तक आते-आते भारत की आजादी के लिए देश के बच्चे, बूढ़े और जवान सभी में जोश और गुस्सा भर उठा था.

तब गांधी जी ने इसका सही दिशा में उपयोग किया और बहुत ही बड़े पैमाने पर वर्ष 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन (Quit India Movement) की शुरुआत की. यह आंदोलन अब तक के सभी आंदोलन में सबसे अधिक प्रभावी रहा. यह अंग्रेजी सरकार के लिए एक बहुत ही बड़ी चुनौती थी.

वर्ष 1942 में महात्मा गांधी द्वारा चलाया गया तीसरा बड़ा आंदोलन ‘ भारत छोड़ो आंदोलन’ कोई माना जाता है. वर्ष 1942 में की गई थी. लेकिन, इसके संचालन में हुई गलतियों के कारण या आंदोलन जल्द ही धारा सा ही हो गया था. अर्थात यह आंदोलन सफल नहीं हो सका था.

इसकी असफलता के पीछे के कारण थे. जैसे कि इस आंदोलन में विद्यार्थी, किसान आदि सभी के द्वारा हिस्सा लिया जा रहा था और उनमें इस आंदोलन को लेकर बड़ी लहर थी. आंदोलन की शुरुआत अलग-अलग तिथियों पर होने से इसका प्रभाव कम हो गया था. इसके अलावा बहुत से भारतीयों को ऐसा भी लग रहा था कि यह स्वतंत्रता संग्राम का चरम है. अब हमें आजादी मिलकर ही रहेगी. उनकी इस सोच ने आंदोलन को कमजोर कर दिया था. लेकिन इस आंदोलन से एक बार यह अच्छी हुई कि इससे ब्रिटिश शासकों को यह महसूस हो गया था, कि अब भारत में उनका शासन नहीं चल सकता है. उन्हें आज नहीं तो कल भारत छोड़कर जाना ही पड़ेगा.

इस तरह गांधी जी द्वारा उनके जीवन काल में चलाए गए सभी आंदोलन ने हमारे देश की आजादी के लिए अपना सहयोग दिया और अपना बहुत गहरा प्रभाव छोड़ा है.

महात्मा गांधी द्वारा चलाए गए आंदोलन की विशेषताएं – Key features of Such Movement

महात्मा गांधी ने जितने भी आंदोलन की है, उन सभी में कुछ बात एक समान थी जिनका विवरण हम नीचे दे रहे हैं :-

  • यह आंदोलन हमेशा शांतिपूर्ण ढंग से चलाए जाते थे.
  • आंदोलन के दौरान किसी भी प्रकार की हिंसात्मक गतिविधि होने पर गांधी जी द्वारा व आंदोलन रद्द कर दिया जाता था. यह भी एक कारण था कि हमें आजादी कुछ देर से मिली.
  • आंदोलन हमेशा सत्य और अहिंसा की नींव पर किए जाते थे

महात्मा गांधी का सामाजिक जीवन – Social Life of Mahatma Gandhi

गांधी जी एक महान राजनेता थे ही लेकिन अपने सामाजिक जीवन में भी वे ‘ सादा जीवन उच्च विचार’ को मानने वाले व्यक्ति में से एक थे.

उनके इस स्वभाव के कारण उन्हें लोग ‘ महात्मा’ कह कर संबोधित करते थे. महात्मा गांधी प्रजातंत्र के बड़े भारी समर्थक थे. उनके दो हथियार थे :- ‘ सत्य और अहिंसा’ इन्हीं हथियारों के बल पर उन्होंने भारत को अंग्रेज से आजादी दिलवाई. गांधी जी का व्यक्तित्व कुछ ऐसा था कि उनसे मिलने पर हर कोई उनसे बहुत प्रभावित हो जाता था.

महात्मा गांधी की मृत्यु – Death of Mahatma Gandhi

30 जनवरी वर्ष 1948 को नाथूराम गोडसे द्वारा गोली मारकर महात्मा गांधी की हत्या कर दी गई थी. उन्हें तीन गोलियां मारी गई थी और उनके मुंह से निकले अंतिम शब्द थे ‘ हे राम! ‘. उनकी मृत्यु के बाद दिल्ली में राजघाट पर उनकी समाधि स्थल बनाया गया है.

महात्मा गांधी से जुड़े कुछ रोचक बातें – Some interesting facts about Mahatma Gandhi

  • ‘ राष्ट्रपिता का खिताब’ (Father Of Nation) महात्मा गांधी को भारत के राष्ट्रपिता का खिताब भारत सरकार ने नहीं दिया था. बल्कि एक बार सुभाष चंद्र बोस ने उन्हें राष्ट्रपिता कह कर संबोधित किया था.
  • गांधी जी की मृत्यु पर एक अंग्रेजी अफसर ने कहा था कि ” जिस गांधी को हमने इतने वर्षों तक कुछ नहीं होने दिया, ताकि भारत में हमारे खिलाफ जो माहौल है, वह और ना बिगड़ जाए, उसी गांधी को स्वतंत्र भारत 1 वर्ष भी जीवित नहीं रख सका.”
  • गांधी जी ने स्वदेशी आंदोलन भी चलाया था. जिसमें उन्होंने सभी लोगों से विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार करने की मांग की थी. फिर स्वदेशी कपड़ों आदि के लिए स्वयं चरखा चलाया और कपड़े भी बनाए.
  • गांधीजी आत्मिक शुद्धि के लिए बड़े ही कठिन उपवास भी किया करते थे.
  • गांधीजी ने जीवन पर्यंत हिंदू मुस्लिम एकता के लिए प्रयास किया था.
  • 2 अक्टूबर को गांधी जी के जन्मदिन पर समस्त भारत में गांधी जयंती मनाई जाती है.

भारत के इतिहास के पन्नों को पलट कर देखें तो गांधीजी बहुत ही महान व्यक्ति थे. गांधीजी ने अपने जीवन में अनेक महत्वपूर्ण कार्य किए. उनकी ताकत ‘सत्य और अहिंसा’ थी और आज भी हम उनके सिद्धांतों को अपनाकर के समाज में महत्वपूर्ण बदलाव ला सकते हैं.

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