The Brahmin Theif and Demon Panchtantra Story – ब्राह्मण , चोर और दानव की कथा

The Brahmin Theif and Demon Panchtantra Story – ब्राह्मण , चोर और दानव की कथा- ऐसे ही और भी पंचतंत्र की कहानियां पढ़ने के लिए आप नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक कर सकते हैं. हमने यहां पर 60 से भी अधिक पंचतंत्र की कहानियों को संग्रहित किया है.

The Brahmin Theif and Demon Panchtantra Story – ब्राह्मण , चोर और दानव की कथा

शत्रु का शत्रु मित्र होता है

एक गांव में द्रोण नाम का एक ब्राह्मण रहता था. भिक्षा मांग कर उसकी जीविका चलती थी. सर्दी हो या गर्मी रुकने के लिए उसके पास घर भी नहीं था, और ना ही उसके पास पर्याप्त वस्त्र थे. एक बार किसी यजमान ने ब्राह्मण पर दया करके उसे बैलों की जोड़ी दे दी.

ब्राह्मण ने उन का भरण पोषण बड़े जतन से किया. आसपास से घी तेल अनाज मांग कर भी उन बैलों को भरपेट भोजन खिलाता रहा. इससे दोनों बैल खूब मोटे ताजे हो गए. उन्हें देखकर एक चोर के मन में लालच आ गया. उसने चोरी करके दोनों बैलों को भगा ले जाने का निश्चय कर लिया. इस निश्चय के साथ ही जब वह अपने गांव से चला तो रास्ते में उसे लंबे लंबे दांतों, लाल आंखों, सूखे बालों और उभरी हुई नाक वाला भयंकर आदमी मिला. The Brahmin Theif and Demon Panchtantra Story

उसे देखकर चोर ने डरते डरते पूछा — ” भाई तुम कौन हो?”

उस भयंकर आकृति वाले आदमी ने कहा — ” मैं ब्रह्मराक्षस हूं, पास वाले ब्राह्मण के घर से बैलों की जोड़ी चुराने जा रहा हूं.”

राक्षस ने कहा -” मित्र! पिछले 6 दिनों से मैंने कुछ भी नहीं खाया है. चलो, आज उस ब्राह्मण को मार कर ही भूख मिटा लूंगा. हम दोनों एक ही मार्ग के यात्री हैं. चलो, साथ साथ चलते हैं.”

शाम को दोनों छुपकर ब्राह्मण के घर में घुस गए. ब्राह्मण के सोने के बाद राक्षस जब उसे खाने के लिए आगे बढ़ने लगा तो चोर ने कहा – ” मित्र! यह बात न्याय अनुकूल नहीं है. पहले मैं बैलों की जोड़ी चुरा लूं, तब तू अपना काम कर लेना.”

राक्षस ने कहा — ” कभी बैलों को चुराते हुए खटका हो गया और ब्राह्मण जग बड़ा तो अनर्थ हो जाएगा, मैं भूखा ही रह जाऊंगा. इसलिए पहले आप मुझे ब्राह्मण को खा लेने दो, बाद में तुम चोरी कर लेना.”

चोर ने उत्तर दिया — ” ब्राह्मण की हत्या करते हुए यदि ब्राह्मण बच गया और जग कर उसने रखवाली शुरू कर दी तो मैं चोरी नहीं कर सकूंगा. इसलिए पहले मुझे अपना काम कर लेने दे.”

दोनों में इस तरह की कहासुनी होने लगी किशोर सुनकर ब्राह्मण जाग उठा. उसे जगा हुआ देख चोर ने ब्राह्मण से कहा — ” ब्राह्मण! यह राक्षस तेरी जान लेने आया है, मैंने इसके हाथ से तेरी रक्षा कर दी.”

राक्षस बोला — ” ब्राह्मण! यह चोर तेरे बैलों को चुराने आया था, मैंने तुझे बचा लिया.”

इस बातचीत से ब्राह्मण सावधान हो गया. लाठी उठाकर वह अपनी रक्षा के लिए तैयार हो गया. उसे तैयार देखकर दोनों वहां से भाग खड़े हुए. The Brahmin Theif and Demon Panchtantra Story

Leave a Comment