चतुर खरगोश और शेर – The Cunning Hare And The Lion

पंचतंत्र की कहानी – चतुर खरगोश और शेर – The Cunning Hare And The Lion. पंचतंत्र की ओर भी कहानियां पढ़ने के लिए आप नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक कर सकते हैं. यहां पर हमने 60 पंचतंत्र की कहानियों को संग्रहित किया है.

चतुर खरगोश और शेर – The Cunning Hare And The Lion

किसी बड़े से घने जंगल में एक बहुत बड़ा शेर रहता था. हर रोज शेर शिकार पर निकलता और एक ही नहीं, दोगी नहीं कई सारे जानवरों का काम तमाम कर देता था.

जंगल के जानवर डरने लगे कि अगर इसी तरह शेर शिकार करता रहा तो एक दिन ऐसा आएगा कि जंगल में कोई भी जानवर नहीं बचेगा.

सारे जंगल मैं सनसनी फैल गई. शेर को रोकने के लिए कोई ना कोई उपाय करना जरूरी हो गया था. एक दिन जंगल के सारे जानवर इकट्ठा हुए और इस प्रश्न पर विचार करने लगे. अंत में उन्होंने तय किया कि वह सब शेर के पास जाकर उनसे इस बारे में बात करेंगे.

दूसरे दिन जानवरों के एक दल शेर के पास पहुंचा. उनके अपनी ओर आते देख शेर घबरा गया और उसने गरजकर पूछा, ‘ क्या बात है? तुम सब यहां क्यों आ रहे हो? ‘

जानवर दल के नेता ने कहा, ” महाराज, हम आपके पास निवेदन करने आए हैं. आप राजा है और हम आपकी प्रजा. जब आप शिकार करने निकलते हैं तो बहुत जानवर मार डालते हैं. आप सबको खा भी नहीं पाते. इस तरह से हमारी संख्या कम होती जा रही है. अगर ऐसा ही होता रहा तो कुछ ही दिनों में जंगल में आपके सिवाय और कोई भी नहीं बचेगा. प्रजा के बिना राजा भी कैसे रह सकता है? यदि हम सभी मर जाएंगे तो हम भी राजा नहीं रहेंगे. हम चाहते हैं कि आप सदा हमारे राजा बने रहे. आप से हमारी विनती है कि आप अपने घर पर ही रहा करें. हर दिन आपके लिए एक जानवर भेज दिया जाएगा. इस तरह से राजा और प्रजा दोनों ही चैन से रह सकेंगे”.

शेर को लगा कि जानवरों की बात में सच्चाई है. उसने पल भर सोचा, फिर बोला अच्छी बात है. मैं तुम्हारे सुझाव को मान लेता हूं. लेकिन याद रखना, अगर किसी भी दिन तुमने मेरे खाने के लिए पूरा भोजन नहीं भेजा तो मैं जितने जानवर चाहूंगा, मार डालूंगा”. जानवरों के पास तो और कोई चारा नहीं था. इसलिए उन्होंने शेर की शर्त मान ली और अपने अपने घर चले गए.

उस दिन से हर रोज शेर के लिए खाने के लिए एक जानवर भेजा जाने लगा. इसके लिए जंगल में रहने वाले सभी जानवरों में से एक एक जानवर, बारी बारी से चुना जाता था. कुछ दिन बाद खरगोश की बारी भी आ गई. शेर के भोजन के लिए एक नन्हे से खरगोश को चुना गया.

वह खरगोश जितना छोटा था, इतना ही चतुर भी था. उसने सोचा, बेकार में मैं शेर के हाथों मारना मूर्खता है. अपनी जान बचाने का कोई ना कोई उपाय अवश्य करना चाहिए, और हो सके तो कोई ऐसी तरकीब ढूंढने चाहिए जिससे सभी को इस मुसीबत से सदा के लिए छुटकारा मिल जाए. आखिर उसने एक तरकीब सोची निकाली.

खरगोश धीरे-धीरे आराम से शेर के घर की ओर चल पड़ा. जब वह शेर के पास पहुंचा तो बहुत देर हो चुकी थी. भूख के मारे शेर का बुरा हाल हो रहा था. जब उसने सिर्फ एक छोटे से खरगोश को अपनी ओर आते देखा तो गुस्से से बौखला उठे और गरजकर बोला, “किसने तुम्हें भेजा है? ” एक तो पिद्दी जैसे हो, दूसरे इतनी देर से आ रहे हो. जिन बेवकूफ कौन है तुम्हें भेजा है मैं उन सब को ठीक कर लूंगा. एक एक का काम तमाम ना किया तो मेरा नाम भी शेर नहीं है.

नन्हे खरगोश ने फादर से जमीन तक झुककर कहा – ” महाराज, अगर आप कृपा करके मेरी बात सुन ले तो मुझे या और जानवरों को दोष नहीं देंगे. वे तो जानते थे कि एक छोटा सा खरगोश आपकी भोजन के लिए पूरा नहीं पड़ेगा, ” इसलिए उन्होंने अच्छे खरगोश भेजे थे. लेकिन रास्ते में हमें एक और शेर मिल गया. उसने पांच खरगोश को मारकर खा लिया.”

यह सुनते ही शेर दहाड़ कर बोला, ” क्या कह रहे हो? दूसरा शेर? कौन है वहां? तुमने उसे कहा देखा? “

” महाराज, वह तो बहुत ही बड़ा शेर है” खरगोश ने कहा, ” वहां जमीन के अंदर बनी एक बड़ी गुफा में से निकला था. वह तो मुझे ही मारने जा रहा था. पर मैंने उससे कहा, ‘ सरकार , आपको पता नहीं है कि आपने क्या कर दिया है. हम सब अपने महाराज के भोजन के लिए जा रहे थे, लेकिन आपने उनका सारा खाना खा लिया है. वे जरूरी यहां आ कर के आप को मार डालेंगे.’

” इस पर उसने पूछा, ” कौन है तुम्हारा राजा? ‘ मैंने जवाब दिया, ” हमारा राजा जंगल का सबसे बड़ा शेर है.” महाराज, मेरे ऐसा कहते ही वह गुस्से से लाल पीला हो करके बोला बेवकूफ इस जंगल का राजा सिर्फ मैं हूं. यह सब जानवर मेरी प्रजा है. मैं उनके साथ जैसा हूं वैसा कर सकता हूं. जिस मूर्ख को तुम अपना राजा कहते हो उस चोर को मेरे सामने हाजिर करो. मैं उसे बताऊंगा कि असली राजा कौन है? महाराज इतना कहकर उस शेर ने आपको लिवआने के लिए मुझे यहां भेजा है.

खरगोश की बात सुनकर के शेर को बड़ा गुस्सा आया और वह बार-बार गरजने लगा. उसकी भयानक स्वर से सारा जंगल दहलने लगा. उसकी भयानक गरज से सारा जंगल सन सना गया. और शेर ने कहा ” मुझे फॉरेन उस मूर्ख का पता बताओ”, शेर ने दहाड़ कर कहा, ” जब तक मैं उसे जान से ना मार दूं, मुझे चैन नहीं मिलेगा.” बहुत अच्छा महाराज, ” खरगोश ने कहा – ” मौत ही उस दुष्ट की सजा है. अगर मैं और बड़ा और मजबूत होता तो मैं खुद ही उसके टुकड़े-टुकड़े कर देता.” The Cunning Hare And The Lion

‘ चलो, ‘ रास्ता दिखाओ, ‘ शेर ने कहा, ‘ फौरन बताओ किधर चलना है? ” ” इधर आई है महाराज, इधर, ” खरगोश रास्ता दिखाते हुए शेर को एक कुएं के पास ले गया और बोला, ‘ महाराज वह दुष्ट शेर जमीन के नीचे किले में रहता है. जरा सावधान रहिएगा किले में छुपा दुश्मन खतरनाक होता है.”

” मैं उससे निपट लूंगा, ” शेर ने कहा, ” तुम यह बताओ कि वह कहां है? ” पहले जब मैंने उसे देखा था तब तो वह यही बाहर खड़ा था. लगता है आपको आता देखकर वह किले में घुस गया है. आइए मैं आपको दिखाता हूं.

खरगोश ने कुएं के नजदीक आकर शेर से अंदर झांकने के लिए कहा. शेर ने कुएं के अंदर झांका तो उसे कुएं के पानी में अपना परछाई दिखाई दी. परछाई को देखकर शेर जोरों से दहाड़ा. कुए के अंदर से आती हुई अपने ही दहाड़ ने की गूंज सुनकर उसने समझा कि दूसरा शेर भी दहाड़ रहा है. दुश्मन को तुरंत मार डालने के इरादे से वह फौरन कुएं में कूद पड़ा.

कूदते ही पहले तो गाकुएं की दीवार से टकरा या फिर धड़ाम से पानी में गिरा और डूबकर मर गया. इस तरह चतुराई से शेर से छुटकारा पाकर नन्हा खरगोश घर लौटा. उसने जंगल के जानवरों को शेर के मारे जाने की कहानी सुनाई. दुश्मन के मारे जाने की खबर से सारे जंगल में खुशी फैल गई. जंगल के सभी जानवर खरगोश की जय जयकार करने लगे.

चतुर खरगोश और शेर – The Cunning Hare And The Lion

इस कहानी से हमें क्या सीख मिलती है?

पंचतंत्र की यह कहानी भी हमें सीख देती है कि घोर संकट की परिस्थिति में भी हमें सूझ भुझ और चतुराई से काम लेना चाहिए और आखिर दम तक प्रयास करना चाहिए. जिस तरह मौत के खतरे में होते हुए भी खरगोश ने चतुराई से काम लेकर के, शेर जैसे खतरनाक और उससे कहीं अधिक बलशाली शत्रु को पराजित कर दिखा दीया. ठीक उसी तरह सूझ भुझ और चतुराई से काम ले कर के हम भी भयंकर संकट में उभर सकते हैं और बड़े से बड़े शक्तिशाली शत्रु को भी पराजित कर सकते हैं.

Leave a Comment