The Lion & The Foolish Donkey – शेर और मूर्ख गधा पंचतंत्र कहानी

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The Lion & The Foolish Donkey – शेर और मूर्ख गधा पंचतंत्र कहानी

किसी घने जंगल में कारलाकेसर नाम का एक शेर रहता था. उसके साथ कालिया नाम का एक गीदड़ भी सदा सेवा कार्य के लिए रहता था. शेर को एक बार एक मत हाथी से लड़ना पड़ा था. तब उसके शरीर पर कई घाव हो गए थे. एक टांग भी इस लड़ाई में टूट गई थी. उसके लिए एक कदम चल पाना भी कठिन हो गया था.

जंगल में पशुओं का शिकार करना उसकी शक्ति से बाहर हो गया था. शिकार के बिना पेट नहीं भर सकता था. शेर और गीदड़ दोनों भूख से व्याकुल हो रहे थे. एक दिन शेर ने गीदड़ से कहा – ” तू किसी शिकार की खोज कर के यहां ले आओ, मैं पास में आए पशु को मार डालूंगा, फिर हम दोनों पेट भर कर के खाना खाएंगे”.

गीदड़ शिकार की खोज में पास के गांव में चला गया. वहां उसने तालाब के किनारे लंबकर्ण नाम के एक गधे को हरी भरी घास की कोमल पतियों को खाते देखा. उसके पास जाकर गीदड़ बोला — ” मामा! नमस्कार, बड़े दिनों बाद दिखाई दिए हो. इतने दुबले कैसे हो गए हो? “.

गधे ने उत्तर दिया — ” भगिनी पुत्र! क्या कहूं? धोबी बड़ी निर्दयता से मेरी पीठ पर बोझ रख देता है. और एकदम भी ढीला पड़ने पर लाठियों से मारता है. घास मुट्ठी भर भी नहीं देता है. खुद मुझे यहां आकर मिट्टी मिली घास के तिनके खाने पड़ते हैं. इसलिए दुबला पतला होता जा रहा हूं”.

गीदड़ बोला – ” मामा! यही बात है तो मैं तुझे एक ऐसी जगह बतलाता हूं, जहां मरकत मणि के समान स्वच्छ हरी घास के मैदान है, निर्मल जल का जलाशय भी पास ही है. वहां जाओ और हंसते गाते जीवन व्यतीत करो.”

लंबकर्ण गधे ने कहा – ” बात तो ठीक है भगनी पुत्र! किंतु हम देहाती पशु है, वन में जंगली जानवर मार कर खा जाएंगे. इसलिए हम वन के हरे मैदानों का उपभोग नहीं कर सकते हैं”.

गीदड़ ने कहा – ” मामा! ऐसा ना कहो. वहां मेरा शासन चलता है. मेरे रहते कोई तुम्हारा बाल भी बांका नहीं कर सकता है. तुम्हारी तरह कई गधे को मैंने धोबियों के अत्याचारों से मुक्ति दिलाई है. इस समय विवाह तीन गंदर्भ कन्या है, जो अब जवान हो चुकी है. उन्होंने आते हुए मुझसे कहा था कि तुम हमारी सच्ची मां हो तो गांव में जाकर हमारी है किसी ग़र्दभ पति को लेते लाना. इसलिए तो मैं तुम्हारे पास आया हूं”. The Lion & The Foolish Donkey

गीदड़ की बात सुनकर के लंबकर्ण के साथ चलने का निश्चय कर लेता है. गीदड़ के पीछे पीछे चलता हुआ वह उसी वन प्रदेश में आ पहुंचा जहां कई दिनों का भूखा शेर भोजन की प्रतीक्षा में बैठा था. शेर के उठते ही लंबकर्ण भागना शुरू कर दिया. उसके भागते भागते भी शेर ने पंजा लगा दिया. लेकिन लंबकर्ण शेर के पंजों में नहीं फंसा, और वहां से भाग गया.

तब, गीदड़ में शेर से कहा — ” तुम्हारा पंजाब बिल्कुल बेकार हो गया है. गधा भी उसके फंदे से बच भागता है. क्या इसी बल पर तुम हाथी से लड़ते हो?”

शेरनी जरा लज्जित होते हुए उत्तर दिया — ” अभी तक मैंने अपना पंजा तैयार भी नहीं किया था. वह अचानक ही भाग गया. अन्यथा हाथी भी इस पंजे की मार से घायल हुए बिना भाग नहीं सकता है.”

गीदड़ ने कहा — ” अच्छा! तो अब एक बार और पर्यटन करके उसे तुम्हारे पास ले आता हूं. यह प्रहार खाली ना जाए.”

शेर ने कहा — ” जो गधा मुझे अपनी आंखों देखकर भागा है, वह अब वापस कैसे आएगा? किसी और पर घात लगाओ.”

गीदड़ ने कहा — ” इन बातों में तुम दखल मत दो. तुम तो केवल तैयार हो कर के बैठे रहो.”

गीदड़ ने देखा कि गधा उसी स्थान पर फिर घास चर रहा है.

गीदड़ को देखकर गधे ने कहा – ” भगिनी पुत्र! तू भी मुझे खूब अच्छे जगह ले गया. एक क्षण और हो जाता तो जीवन से हाथ धोना पड़ता. भला, वह कौन सा जानवर था जो मुझे देख कर उठा था, और जिसका वज्र समान हाथ मेरी पीठ पर पड़ा था?”.

तब हंसते हुए गीदड़ ने कहा –” मामा! तुम भी विचित्र हो, गर्दाभी तुम्हें देखकर आलिंगन करने की उठी और तुम वहां से भाग आए. उसने तो तुमसे प्रेम करने को हाथ उठाया था. वह तुम्हारे बिना जीवित नहीं रहेगी. भूखी प्यासी मर जाएगी. वह कहती है, यदि लंबकर्ण मेरा पति नहीं होगा तो मैं आग में कूद पडुंगी.

इसलिए अब उसे अधिक मत सताओ. अन्यथा स्त्री हत्या का पाप तुम्हारे सिर पर लगेगा. चलो, मेरे साथ में चलो.”

गीदड़ की बात सुनकर के एक गधा उसके साथ शेर जंगल की ओर चल पड़ा. वहां पहुंचते ही शेयर उस पर टूट पड़ा. उसे मारकर शेर तालाब में स्नान करने गया. गीदड़ रखवाली करता रहा. शेर को जरा देर हो गई. भूख से व्याकुल गीदड़ ने गधे के कान और दिल के हिस्से काट कर खा लिये. The Lion & The Foolish Donkey

शेर जब भोजन पूजन से वापस आया तो उसने देखा कि गधे के कान नहीं थे, और दिल भी निकला हुआ था. क्रोधित होकर उसने गीदड़ से कहा –” पापी! तूने इसके कान और दिल खा करके इसे जूठा क्यों किया”?.

गीदड़ बोला — ” स्वामी! ऐसा ना कहो. इसके कान और दिल थे ही नहीं, तभी तो यह एक बार जाकर के फिर भी वापस आ गया था”.

शेर को गीदड़ की बात पर विश्वास हो गया. दोनों ने बांटकर गधे का भोजन किया. The Lion & The Foolish Donkey

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